हिचकोलों से भरी ज़िंदगी

हिचकोलों से भरी ज़िंदगी
ढूंढ़ती किनारा चुपचाप सा
          राजेश’अरमान’

Related Articles

अरमां था ज़िंदगी

अरमां था ज़िंदगी से कभी मुलाकात होगी बिठा पलकों पे कुछ खास बात होगी सोचता था होगी ज़िंदगी मेरी फूलों की तरह निकाले होगी घूँघट…

किनारा

कश्ती पर सवार है जिंदगी ना जाने कब मिलेगा किनारा दूर से तो दिख रहा है खुबसूरत हर एक नजारा फ़िर रहा हूँ मैं मारा…

Responses

New Report

Close