अद्भुत है यह लेखनी भी
स्वयं को ब्रह्मा बना देती है
कभी करुण रस का पान करती है
कभी प्रेम की सरिता बन जाती है
जहाँ रवि नहीं पहुँचता है
वहां प्रकाश ये फैलती है
दिल की गहराई भी समझती है
और आंखों में उतर जाती है।।
अद्भुत है यह लेखनी भी
स्वयं को ब्रह्मा बना देती है
कभी करुण रस का पान करती है
कभी प्रेम की सरिता बन जाती है
जहाँ रवि नहीं पहुँचता है
वहां प्रकाश ये फैलती है
दिल की गहराई भी समझती है
और आंखों में उतर जाती है।।