अपने ख़्वाबों के लिए

अपने ख़्वाबों के लिए कोई रात रखना
अपने हिस्से की खुद से मुलाकात रखना
मौसम चाहे जैसा बदले जब बदले
अपने ही अंदर कोई बरसात रखना
            राजेश’अरमान’

Comments

One response to “अपने ख़्वाबों के लिए”

Leave a Reply

New Report

Close