Site icon Saavan

अभागी क़िस्मत

आज तू हंस ले ,
खुलकर मुझ पर,
मगर ,थोड़ा सा सब्र कर;
अरी; सुन ! मेरी अभागी क़िस्मत!
मैं सीख तुम्हें सीखलाऊंगा,
मेहनत की जंजीरों से जकड़कर,
मुलाजिम तुम्हें बनाऊंगा।
मुलाजिम, तुम्हें बनाऊंगा!

——मोहन सिंह मानुष

Exit mobile version