वो मिस्त्री के साथ काम करने वाला मजदूर, कहना मानने को है मजबूर, ईंट लपका दे, मसाला फेंट दे, थोड़ा गीला बना, थोड़ा सख्त बना, चल टेक लेकर आ, सरिया मोड़, टूटी हुई बल्ली को […]
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वो मिस्त्री के साथ काम करने वाला मजदूर, कहना मानने को है मजबूर, ईंट लपका दे, मसाला फेंट दे, थोड़ा गीला बना, थोड़ा सख्त बना, चल टेक लेकर आ, सरिया मोड़, टूटी हुई बल्ली को […]
वक्त कब क्या रंग दिखाए हम नहीं जानते वक्त के दिए हुए जख्म कैसे मिटाएं हम नहीं जानते क्या पता था उस देवकी को, जिस डोली में बिठाकर ,विदा कर रहे थे कंस याकायाक उसे […]
कोरोना बीमारी की दूसरी लहर ने पूरे देश मे कहर बरपाने के साथ साथ भातीय तंत्र की विफलता को जग जाहिर कर दिया है। चाहे केंद्र सरकार हो या की राज्य सरकारें, सारी की सारी […]
कोरोना का कहर है हर गली हर शहर है फिर भी लोकतंत्र का पर्व है सोशल डिस्टेंसिग किधर है ? वोट पड़ रहे हैं धड़ाधड़ वो कहाँ है जिन्हें कोरोना से लगता डर है कैसा […]
कटघरे में खड़ा है हर शख्स आज… कुदरत पूछ रही है कई सवाल आज… काबिल है क्या कोई हम में से जवाब जो दे सके आज… काटी वही शाख हमने जिस पर आराम फरमाया था […]
जीवन श्लेष युक्त कविता है इसको सुलझाते-सुलझाते सारी उम्र बीत जाती है लेकिन सुलझ नहीं पाती है। अर्थ, रहस्य, लक्ष्य क्या इसका है किस हेतु बना यह या केवल है स्वप्न देखने मिटने हेतु बना […]
नाटक के किरदार अनेकों रूप-रंग के हैं अलग अलग मुखौटे पहने अलग ढंग के हैं। जीवन में मिल जाते हैं हम भी घुल मिल जाते हैं, कभी पहचान कर लेते हैं कभी धोखा खा जाते […]
बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने सदियों लगेगी मूशकुराने में, अजब सी दरियादीली देखी ज़माने की, गरीबों को रुलाने में,अमीरों को हँसाने में. कहीं पर खुले अत्तयाचार है,तो कहीं पे मीठी जुबान पे तलवार है, […]
आओ अपने भारत का भ्रमण कर ले, बिसरी हुई नृत्यकला फिर से चित्रण कर ले, दक्षिण भारत की नृत्य शैली है भरतनाट्यम, अपने केरल की नृत्य शैली है मोहिनीअट्टम, अपने उत्तर भारत का प्रमुख कत्थक […]
नृत्य कला तो ईश्वर की कृपा से मिला हुआ वरदान है, पर नृत्य को “नाच” कहकर संबोधित करना यह नृत्य कला का अपमान है। नृत्य कला युगो-युगो से चली आई, क्या इसका तुमको भान है? […]
बड़ा सुहाना मनभावन मौसम आया है, बादलों से गिरती बूंदों ने, धरती का संताप मिटाया है। बड़ा मनभावन मौसम आया है।। काले-काले बादल उमड़_ घुमड़ कर आए, मेढक भी देखो बिलों से निकल, टर्र_ टर्र […]
लओट कर ना आया,ओ रहबर – रहगुजर मेरा, त उमर रहा,तनहा सफर मेरा, हर रिश्ते फरेब देते रहे मुझे,ज़िन्दगी के हर मोड़ पर, बेवजह नेछावर कर दिए मैंने लहु का एक एक कतरा मेरा, ये […]
पानी है यदि सफलता अभ्यास कीजिये, अपने हुनर का तुम निरंतर अभ्यास कीजिये। व्यवहार में कमी हो कहीं अहसास कीजिये कमियां सुधारने का, अभ्यास कीजिये। आदत है बोलने की तो सच बोलिये, जिह्वा में सच […]
रोना नहीं है तुम्हें प्रतिकार करना है, बुरी नजर से देख पाये नहीं कभी कोई , तुम्हें बन दुर्गा, महाकाली दुष्ट दल को मसल कर रखना है। तुम्हारी राह तब तक है नहीं महफूज जब […]
कुछ नया इतिहास रचना है तो हद को लाँघिये अन्यथा रेखा के भीतर, इंच में कद नापिये। दूसरे की औऱ अपनी कीजिये तुलना नहीं, तुम गलत के सामने गलती से भी झुकना नहीं। लिंग से […]
आज की शिक्षित समाज के लोगों को मैंने अनपढ़ पाया , बेटी बनी बहू को भी एक पल में ठुकराया, मानवता तो बची नहीं जताते बड़ा अपना_ पराया , मायका भी है ससुराल भी है […]
2 साल अभी बस बीते, पोते की खुशी में सब जीते , अचानक पति की तबीयत बिगड़ी और वह सांस ना ले पाया, छोड़ दी उसने अपनी सांसे ऑक्सीजन उसे न मिल पाया , बेटे […]
आज मन बड़ा द्रवित हुआ , सोचा सबको बतला दूं, समाज का एक ऐसा भी रूप सोचा सब को दिखला दूं, बड़ा परेशान पिता था बेटी की शादी के लिए , ना जाने कितने लड़के […]
क्यूँ आई दुनिया में मैं मां , जब जिल्लत जग की सहना था , मानव समाज के नियमों के , ताने बाने में रहना था । गर बेटा मैं भी होती तो , मेरा मन […]
है अनमोल धरोहर ये अपनी बौद्धिक संपदा कर सकता इसे कोई इसे क्षीण नहीं ,रहती साथ में सर्वदा कोई नया काज करें , या कोई हो स्रजित् अविष्कार हो कोई कलात्मक कार्य , या हो […]
धरती माता ! धरती माता ! करूँ माँ कैसे मैं तेरा गुणगान, आज तो निकली जा रही है सबके प्राण | आज हर शै की रौनक जा चुकी है , चारो तरफ उदासी छा चुकी […]
जब सत्ता का नशा किसी व्यक्ति छा जाता है तब उसे ऐसा लगने लगता है कि वो सौरमंडल के सूर्य की तरह पूरे विश्व का केंद्र है और पूरी दुनिया उसी के चारो ओर ठीक […]
है कि श्रीकृष्ण की अपरिमित शक्ति के सामने दुर्योधन कहीं नही टिकता फिर भी वो श्रीकृष्ण को कारागृह में डालने की बात सोच सका । ये घटना दुर्योधन के अति दु:साहसी चरित्र को परिलक्षित करती […]
कहा पेड़ ने मानव से कुल्हाड़ी मत चलाना मैं तुम्हारा पांव हूँ जब जाओगे मझधार में मैं तुम्हारी नाव हूं बचोगे तुम भी नहीं मुझे मारकर मैं तुम्हारी छाँव हूं प्यासे मर जाओगे मै बदलो […]
अंग्रेजों के साहित्य और विचार हमारे मन मस्तिष्क में बैठे हैं डेरा डाल फूट डालो शासन करो नीति जैसे है हाल हमारी संस्कृति उपेक्षित है हम उलझे हैं अंधे अनुकरण के जाल हिंदी भाषा शर्माती […]
बीत गया है ख़ुशी और गम बांटने का जमाना पागलपन है अकेले ही हंसना रोना गुनगुनाना काटते हैं ये जब इन्हें बांटते नहीं हैं कितना मुश्किल है अब सुनना और सुनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है […]
कभी-कभी हमारी बात पर भी गौर कीजिए, मीठे के साथ- साथ में कड़वा भी पीजिये। अंगूर, सेब, आम सब आम बात है, पंचरत्न नीम का भी स्वाद लीजिये। सूखा पड़े न वक्ष पर अश्कों से […]
एक बूढ़ी अम्मा का घर आना हुआ, बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ, अम्मा कहती जब से ई मोबाइल आया, वयस्कों संग बच्चा भी हमसे बात करने से कतराया, जैसे ही सुबह हुई बच्चों ने […]
आज कल परसों कभी तो पायेंगे कुछ नई आशा की किरणें दोस्तों। कब तलक भय का रहेगा राज यह कब तलक फैली रहेगी वेदना। कब तलक होगा रुदन चारों तरफ कब तलक साँसों के संकट […]
नींद पलकों में भरी स्वप्न आंखों में सजे आज आलस्य त्याग और कल मिलेंगे मजे। आज है काली निशा तारे तक खो गए हैं ठोस चट्टान भी देख यह रो गए हैं। ये हवा चल […]
अर्थ का महत्व है शब्द तो शब्द है, बिना अर्थ के शब्द निरर्थक है। अर्थ कुछ भी लगाया जा सकता है, निश्चित अर्थ या निर्मित अर्थ। चेहरे के भाव का अर्थ मूँछों में ताव का […]
जब सांसे हो रही है कम ,आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम, आओ नमन करे हम वसुधा, को जो मिटाती है हम सबकी क्षुधा को, जो बिना भेदभाव हम सबको पाले,वह भी चाहे पेड़ों की […]
तोहमत लगाने की आदत कब की छूट चुकी है मैं गुलाम ही सही मुझे सबकी आजादी की पड़ी है मुक्त होती है रुह मरकर ही मुझे मुक्त होना है जीते जी ही इक बीज किसी […]
कूड़े के ढेर में खोजने में लगे थे नन्हें नन्हें हाथ, तन्मयता के साथ, जरूरत की चीजें, दे रहे थे सामाजिक जीवन को, सच्ची सीखें। पूछा तो बोले उनके घरों से निकला हुआ यह कूड़ा […]
आकाश की सुंदरता बढ़ाता कपासी बादल नहीं धरती का प्रियतम है वह काला बादल जो अपने प्रेम से करता है धरा का शृंगार.. कानों में रस घोलती सुरीली तान फूटती है काली कुरूप कोयल के […]
दसो दिशाओ मे बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर पड़े हैं तैयार उत्सुक हैं निगल जाने को संसार वो हमारे पास भी आते हैं और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं इस […]
आ गया साल है पांचवा जानिए छा रहा है सहज मेघ ये मानिए बूंद दो भी बरस के न जाएगा ये मोर के जैसे शोर को छानिए घर बनेगा उन्ही का हकीकत यही पैर के […]
बह रही पवन ,खिल रहे सुमन, कितना अदभुद यह नजारा है, छंट गया तिमिर, बीती यामिनी, रवि की किरणों ने पैर पसारा है। नभ में चिड़ियाँ,कलरव करतीं, गुंजन यह मधुरिम छाया है, आलस्य त्याग हे […]
आज भी नहाते हैं लोग सुबह उठकर फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं दर्पण मे देखकर चेहरा अपना मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर बड़े आकार […]
पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]
राहुल बोला.. यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है, इसने कैसी आफत मचाई है। इन्सान, इन्सान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। बस घर में ही पड़े रहो, चलाते रहो मोबाइल। ना कहीं […]
श्रीराम हरो पीड़ा मनुज अब सुमिरन करता है। जहां तहाँ फैली महामारी, दुखी हुई प्रजा यह सारी, दूर करो रजनी अंधियारी, सुमिरन करता है, मनुज अब सुमिरन करता है। संकट से घिर गए हैं सारे […]
अपने लोक की ये कथा है, अपनी मां धरनी बसुन्धरा है निज सुत की करनी से दुःखी हो व्याकुल हो त्राहि-त्राहि करने लगी वो तब उसने तप का लिया सहारा त्रिलोक के स्वामी को जाके […]
बेटी और बेटे में इक फर्क समझ में आया ससुराल में रहकर भी मैके का साथ निभाया। दूर रहकर भी मनसे ममत्व नहीं मिट पाया पास रहकर भी यह पुत्र समझ नहीं पाया। पुत्र को […]
एक थी नारी सबको थी प्यारी सब चाहते थे हो जाए हमारी ममता की मूर्ति और दुनिया पुजारी तभी एक दिन दवे पांव आया नरवाद ममता के मंदिर में मचाया हाहाकार स्वार्थ और अहं से […]
कई दिनो से सोच रहा था पंत की तरह प्रकृति चित्रण करूं पद्मकार की तरह ऋतु वर्णन करूँ परंतु एक दिन सुबह का अखबार पढ़कर मेरा विचार बदल गया अखबार का शीर्षक था मनुष्य ने […]
देश में मचा हाहाकार है, बीमारों की भरमार है। ऑक्सीजन और दवा की कमी हुई, चिकित्सक भी लाचार हैं। रैड लिस्ट में आया हिंदुस्तान, बचा लो बीमारों की जान। कोरोना से पीड़ित है देश, कोरोना […]
भीड़ के बीच में ख्याल खुद का रखो, हर सको दर्द दूजे का नुस्खा रखो। वेदना हो भले दिल के भीतर भरी मगर होंठ में आप मुस्कां रखो। यह न अहसास हो दूसरे को कभी […]
आज कयी बच्चों के एक पिता को दवा के अभाव में तङपते देखा है ना उसके भूख की चिन्ता न परवाह उसकी बीमारी की गज़ब दास्तां है, बुढ़ापे की लाचारी की। बिस्तर पर पङे, पर […]
कैसा मंजर यह आया है, चहुंओर अंधेरा छाया है! कितने कुलदीपक बुझ ही गए, कितने परिवार यू उजड़ गए, गर नहीं सचेते अब भी तो, उठ सकता सिर से साया है, चहुंओर अंधेरा छाया है! […]
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