आंखों का नूर हैं ये आंसू
नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो,
किसी अपने पे तरस तो खाया करो।
कहीं कोई परेशां सा हो जाता है ,
कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो ।
आंखों का नूर हैं ये आंसू
नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो,
किसी अपने पे तरस तो खाया करो।
कहीं कोई परेशां सा हो जाता है ,
कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो ।