आंखों का नूर हैं ये आंसू
नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो,
किसी अपने पे तरस तो खाया करो।
कहीं कोई परेशां सा हो जाता है ,
कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो ।
आंखों का नूर
Comments
24 responses to “आंखों का नूर”
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Thank you master ji
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बहुत सुन्दर रचना
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शुक्रिया प्रज्ञा जी
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वाह, बहुत ही लाजबाब अभिव्यक्ति। स्नेहमयी भाव
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏
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Thanks bro
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अंदाज़ काफी लाजवाब है।
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Thank you very much sir.
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सुंदर
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सादर धन्यवाद भाई जी 🙏
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत ही सुंदर
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बहुत धन्यवाद आपका ईशा जी🙏
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अतिसुन्दर
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Thank you Piyush ji
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very nice lines
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बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
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बहुत खूब
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शुक्रिया कमला जी 🙏
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लाजवाब
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Thanks for your pricious complement 🙏
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