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आगज़नी किसकी है..

‘उलझ पड़ें न कहीं हम, के इस ज़िन्दगी से,
अपनी क्या बनेगी, आज तक बनी किसकी है..
इसलिए रखता हूँ हर आतिश को खुद में दफन,
कहीं वो पूछ न बैठे कि आगज़नी किसकी है..’

– प्रयाग

मायनें :
आतिश – चिंगारी

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