Site icon Saavan

आसमाॅं भी रो दिया सुन कर मेरी दास्ताँ

आसमाॅं भी रो दिया,
सुन कर मेरी दास्ताँ ।
हमने कहा चाॅंद तारों से,
कोई दूर न हो अपने प्यारों से।
ये दर्द बहुत ही गहरा है,
लगता है वक्त ही ठहरा है।
जो गया,वह लौट कर नहीं आता है,
कोई न जाने वहाँ कैसा पहरा है।
अब उसके बिना बितानी होगी,
कैसी वो जिन्दगानी होगी।
यह सोच के दिल घबराता है,
उसके बिन जीना ही नहीं आता है।
दायित्व और भी हैं लेकिन,
कैसे पूरे कर पाऊँगी।
संगी साथी सब समझाते हैं, पर..
कैसे यह विष पी पाऊँगी॥
_______✍गीता

Exit mobile version