आसमाॅं भी रो दिया सुन कर मेरी दास्ताँ
आसमाॅं भी रो दिया,
सुन कर मेरी दास्ताँ ।
हमने कहा चाॅंद तारों से,
कोई दूर न हो अपने प्यारों से।
ये दर्द बहुत ही गहरा है,
लगता है वक्त ही ठहरा है।
जो गया,वह लौट कर नहीं आता है,
कोई न जाने वहाँ कैसा पहरा है।
अब उसके बिना बितानी होगी,
कैसी वो जिन्दगानी होगी।
यह सोच के दिल घबराता है,
उसके बिन जीना ही नहीं आता है।
दायित्व और भी हैं लेकिन,
कैसे पूरे कर पाऊँगी।
संगी साथी सब समझाते हैं, पर..
कैसे यह विष पी पाऊँगी॥
_______✍गीता
वो जो कल था मेरा, आज बहुत याद आता है
हर पल बीतता उसका नाम दोहराता है
सबर कर बैठ जाएं कैसे कोई तो बताओ
बात उसकी हो तो हमे सबर ही कहाँ आता है
समीक्षा हेतु आभार प्रवीण जी
उत्तम रचना
बहुत बहुत धन्यवाद