कर्म अपने हाथ में है
और बाकी कुछ नहीं,
एक ईश्वर की है सत्ता
और बाकी सच नहीं।
जो मुझे यह दिख रहा है
अपने चारों ओर का,
एक सपना सा है यह सब
और बाकी कुछ नहीं।
कर्म अपने हाथ में है
और बाकी कुछ नहीं,
एक ईश्वर की है सत्ता
और बाकी सच नहीं।
जो मुझे यह दिख रहा है
अपने चारों ओर का,
एक सपना सा है यह सब
और बाकी कुछ नहीं।