एक जानी पहचानी सड़क पर

एक जानी पहचानी सड़क पर
चला जा था मैं बेखबर
तभी कुछ पहचानी सी आवाज़ें सुनाई दी
पुलिस की गाडी की आवाज़ सुनाई दी
देखा सड़क पर पड़ी हुई थी एक लाश
जिसके कातिल को कर रहे थे लोग तलाश
मैं भी लाश के समीप पंहुचा
देखने लगा सब के साथ लाश को
पुलिस ले रही थी लाश के जेबों की तलाशी
निकली कुछ उधार के कागज़ के पुरजे
निकले कुछ बिलों के अदायगी के स्मरणपत्र
बिजली काटने के धमकीपत्र
और न जाने कितने ऐसे पत्र
जो रौंद के रख दे किसी को भी
एक पास खड़ा व्यक्ति बोला
लगता कोई गाडी इसे कुचल गई
देखो इस के शरीर पर निशान पहियों के
मैं भीड़ को चीरता हुआ लाश के करीब पंहुचा
किसी ने कहा ,क्या तुम इसे जानते हो ?
क्या इस लाश को पहचानते हो ?
मैंने कहा हा ,इसे मैं पहचानता हूँ
इसके शरीर पर पड़े पहियों के निशान
आज की महंगाई रुपी गाड़ी के है
ये मेरे देश का आम आदमी है
राजेश’अरमान’

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