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*एक-दूजे के लिए*

नारी स्नेह की मूरत है,
लुटाती प्रेम और ममता।
पुरुष पौरुष की सूरत है,
उसका प्रेम नहीं थमता।
देता है अधिक दिखावा करे कम,
दे खुशियां मिटा दे गम।
नारी ममता की मूरत है,
पुरुष संघर्ष की सूरत है,
दोनों को ही इस जहां में,
एक-दूजे की जरूरत है।।
____✍️गीता

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