ईश्वर से दरख्वास्त है मेरी
जन्म ने दे इस धरती पर
नज़र नही आता क्या उनको
जो बीत रही हम नारी पर
दुआ है मेरी उस अल्लाह से
कहर भी बरसे हर नर जाति पर
जो दर्द सहा उस नारी ने
वो दर्द इस कर्ज की मांग बने
जिस यौन से जीवन मिला था
वही मौत का द्वार बने
ईश्वर से दरखास्त है मेरी
रखले अपना दास बना कर
या भले जला कर राख बना दे
पर जन्म न दे इस धरती पर
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