एक शहर मे तीन मित्र

एक शहर मे तीन मित्र रहते थे,तीनो मे बहुत गहरा मित्रता थी,
एक का नाम गौरव जो शांत-सोभाव के थे उनको गीत गाना गुनगुना कविता लिखने का इश्क चहरा हुआ था,,
दुसरा मित्र सौऱभ जो पेशा से शिक्षक थे इन्हे दुनिया दारी से कोई मतलब नही रहती,,
तीसरा मित्र प्रसांत ,,
जो थोड़ा हटके थे इन्हे नशा के साथ लड़की के पीछे भागना दौड़ना इन्हे लगा रहता,,
दोनो मित्र यानि गौरव और सौरभ लाख समझाये भला कोई इस उम्र मे समझता है,,
वो लड़की के पीछे भागते रहा,,
एक दिन की बात है प्रसांत को कुछ दिन से लड़की बात नही कर रही थी जिससे प्रसांत बहुत परेशान रहने लगा।
दोनो मित्र को लाख समझाने से वो नही समझा मित्र को ही भला बुरा कह देता और फिर नशा मे डुब जाता,
लड़की बड़े परिवार की थी जिसके कारण वो प्रसांत से बात करना नही चाहती लेकिन वो अपने जिद पर अरे रहा लड़की अपने जिद पर दोनो मित्र परेशान रहने लगे भला कोई मित्र परेशान रहे तो कैसे कोई दुसरा मित्र नीद की रोटी खा सकता,,
बाद मे प्रसांत को रोटी की भुख नही नशे की भुख लग गयी,प्यार मे घोखा खाकर वो बदले की आग मे खुद को जला लिया,
लड़की की इश्क ने बेचारे को मित्र की मित्रता पर भी शक होने लगा,,
बाद मे प्रसांत सबसे दुर होकर नशे को अपना साथी बना लिया ,,
जो कि दोनो मित्र को चिंता का विषय बना हुआ है।

मै आप सबो को एक कहानी के जरीय कहना चाहता हूँ प्यार रूपी नाटक करने वाले लड़की से दुर रहे नही तो आपके शुभचिंतक भी साथ छोड देगे

Comments

3 responses to “एक शहर मे तीन मित्र”

  1. Kanchan Dwivedi

    Shi kaha

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