Site icon Saavan

कमाल है..

***ये तो कमाल ही है***
सहेली, नहीं है किस्मत
फ़िर भी रूठ जाती है
पहेली,नहीं है बुद्धि,
फ़िर भी उलझ जाती है
आत्म-सम्मान, नहीं है बदन
फ़िर भी चोट खाता है
और इंसान, नहीं है मौसम
फ़िर भी देखो ना ,बदल जाता है..

*****✍️ गीता

Exit mobile version