कमाल है..

***ये तो कमाल ही है***
सहेली, नहीं है किस्मत
फ़िर भी रूठ जाती है
पहेली,नहीं है बुद्धि,
फ़िर भी उलझ जाती है
आत्म-सम्मान, नहीं है बदन
फ़िर भी चोट खाता है
और इंसान, नहीं है मौसम
फ़िर भी देखो ना ,बदल जाता है..

*****✍️ गीता

Comments

4 responses to “कमाल है..”

  1. सुंदरतम् रचना..

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद प्रज्ञा बहन…सुस्वागतम् 💐

  2. बहुत बढ़िया वाह

    1. सादर धन्यवाद सर बहुत बहुत आभार 🙏

Leave a Reply

New Report

Close