मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी
तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी
अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले
तूने प्यार के आगे मेरी औक़ात कम आंकी ।।
मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी
तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी
अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले
तूने प्यार के आगे मेरी औक़ात कम आंकी ।।