कम आंकी

मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी

तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी

अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले

तूने प्यार के आगे मेरी औक़ात कम आंकी ।।

Comments

2 responses to “कम आंकी”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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