कर्म है बीज
जो भी करूँगा,
वह उगेगा, खिलेगा
मुझे कल,
फल उसी के मुताबिक मिलेगा।
धर्म है प्रेम,
नफरत नहीं है,
प्रेम की राह चलता रहूंगा,
कल उसी के मुताबिक मिलेगा।
कर्म है बीज
जो भी करूँगा,
वह उगेगा, खिलेगा
मुझे कल,
फल उसी के मुताबिक मिलेगा।
धर्म है प्रेम,
नफरत नहीं है,
प्रेम की राह चलता रहूंगा,
कल उसी के मुताबिक मिलेगा।