कविता सजी
चारों तरफ,
श्रृंगार करके
हर तरह का।
दर्द भी है
प्रेम भी है,
चाह भी है
आह भी।
जिंदगी कविता है
कविता ही
जिंदगी है।
कविता सजी
चारों तरफ,
श्रृंगार करके
हर तरह का।
दर्द भी है
प्रेम भी है,
चाह भी है
आह भी।
जिंदगी कविता है
कविता ही
जिंदगी है।