कविता

कविता सजी
चारों तरफ,
श्रृंगार करके
हर तरह का।
दर्द भी है
प्रेम भी है,
चाह भी है
आह भी।
जिंदगी कविता है
कविता ही
जिंदगी है।

Comments

One response to “कविता”

  1. बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ

Leave a Reply

New Report

Close