कहां आ गए हैं हम। प्रतिमा चौधरी 6 years ago कहां आ गए हैं हम, जहां खामोश-सी शामें हैं। और चुप-सा सूरज उगता है। ना बांटता है मुस्कान, ना रौनकें फैलाता है।