किसी से गिला नही किसी से सिकवा नही,
एक दिन आएगा ,
एेसा की मै कही नजर नही आऊँगा—-
बहुत दु:ख दिया अपनो ने दिल के अन्दर कही समाजाऊँगा,
उस दिन से किसी से गिला नही सिकवा नही,
दो दिन याद करोगे अपना सब अगले दिन फिर किसी को याद नही आऊँगा,
मुझे मालुम था,
कि डाल पर खिलते फुल की तरह भी तोड़ लिया जाऊँगा।।
किसी से गिला नही किसी से सिकवा नही।

Comments
4 responses to “किसी से गिला नही किसी से सिकवा नही।”
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बेहतरीन
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धन्यवाद सर
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वाह
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धन्यवाद
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