खुले आसमान तले सुकून मिलता है
बंद कमरे में घुटन होती है
जब नींद के आगोश में
होता है जहान
प्रज्ञा किसी की यादों में
बहुत रोती है…
खुले आसमान तले सुकून मिलता है
बंद कमरे में घुटन होती है
जब नींद के आगोश में
होता है जहान
प्रज्ञा किसी की यादों में
बहुत रोती है…