खुले आसमान तले

खुले आसमान तले सुकून मिलता है
बंद कमरे में घुटन होती है
जब नींद के आगोश में
होता है जहान
प्रज्ञा किसी की यादों में
बहुत रोती है…

Comments

7 responses to “खुले आसमान तले”

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब, अतिसुन्दर

  2. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

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