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जख्म

जख्म हरा रहता हरदम नहीं।
वक़्त से बड़ा कोई मरहम नहीं।
जिस्मानी घाव तो भर जाते हैं,
मिटता दिल पर लगा जख्म नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

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