जख्म

जख्म हरा रहता हरदम नहीं।
वक़्त से बड़ा कोई मरहम नहीं।
जिस्मानी घाव तो भर जाते हैं,
मिटता दिल पर लगा जख्म नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

Comments

16 responses to “जख्म”

  1. Deovrat Sharma Avatar

    ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ बेहतरीन रचना

    1. देवेश साखरे 'देव' Avatar

      बहुत बहुत शुक्रिया

  2. क्या बात है

Leave a Reply

New Report

Close