लब खामोश हों फिर भी
बहुत कुछ कह जाते हैं
आँखें नम हों फिर भी
हम मुस्कुरा जाते हैं
कोई नहीं समझता
तन्हा दिल के गमों को
चीखकर आह निकले तो
जमाना तमाशबीन ही समझता है…
लब खामोश हों फिर भी
बहुत कुछ कह जाते हैं
आँखें नम हों फिर भी
हम मुस्कुरा जाते हैं
कोई नहीं समझता
तन्हा दिल के गमों को
चीखकर आह निकले तो
जमाना तमाशबीन ही समझता है…