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ज़िन्दगी अब मेरी

ज़िन्दगी अब मेरी
बिखर के ना रह जाये

रोती हैे मेरी आँखे
कोई सवाल ना कर जाये

लबो पे है
जाने कैसी हँसी

जुबां तो ख़ामोश है
ख़ामोश नज़रें ना सब कुछ कह जाये

रुक जा ज़रा
मेरे हमसफ़र

कोई राहों में
तुझसे कही छूट ना जाये..

नेहा

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