ठंढी का मौसम आया है।
संग मेरा मान बढ़ाया है ।।
पुलकित होकर कहता चाय।
बार – बार सब मांगते चाय।।
कभी खुशी कम हो जाती है।
जब बीच पकौड़ी आ जाती है।।
झुंझला के रह जाता ये चाय।
च्यवनप्राश क्यों आया भाय।।
ठंढी का मौसम आया है।
संग मेरा मान बढ़ाया है ।।
पुलकित होकर कहता चाय।
बार – बार सब मांगते चाय।।
कभी खुशी कम हो जाती है।
जब बीच पकौड़ी आ जाती है।।
झुंझला के रह जाता ये चाय।
च्यवनप्राश क्यों आया भाय।।