ठंढी में चाय

ठंढी का मौसम आया है।
संग मेरा मान बढ़ाया है ।।
पुलकित होकर कहता चाय।
बार – बार सब मांगते चाय।।
कभी खुशी कम हो जाती है।
जब बीच पकौड़ी आ जाती है।।
झुंझला के रह जाता ये चाय।
च्यवनप्राश क्यों आया भाय।।

Comments

One response to “ठंढी में चाय”

  1. Geeta kumari

    ठंड के मौसम में चाय पर बहुत सुंदर कविता

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