तमाम दर्द मिट गये।

मेरे आँखो मे गुमाण उनका था ,
वसा ना पाया मेरे आँखो ने किसी दुसरे को दिल मे क्योकि मकान उनका था !
तमाम दर्द -जख्म मिट गये मेरे लेकिन जो ना मिट पाये उसमे नाम उनका था।।

जेपी सिह

Comments

3 responses to “तमाम दर्द मिट गये।”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

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