तस्वीरों में।

सब कुछ मिलकर लगे जैसे कुछ ना मिला हो
कैसी कमी नज़र आती है हाथों की लकीरों में
जिनसे मिलते थे हम अक्सर सब-ओ-रोज़
आज सिर्फ यादें ही मिला करती है तस्वीरों में

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