Site icon Saavan

तुझसा बनना चाहती हूँ

मैं पीङ तेरी अपनाना चाहती हूँ
तेरे आँसूओ की वज़ह जानना चाहती हूँ ।।
तेरी साधना, तपस्या, त्याग के भाव को
बस अपने में समाना चाहती हूँ ।।
तेरी करूणा वात्सल्य ममत्व के गुणों को
खुद में खुद से पिङोना चाहती हूँ ।।
तू ज्ञान की मूर्ति, कामनाओं की करे पूर्ति
तुझ जैसी ही अन्नपूर्णा, बनना चाहती हूँ ।।
कभी ज़िद पे न अङती, दूजे के लिए को बदलती
मैं भी अपनी हठधर्मिता, तुझ-सा मिटाना चाहती हूँ ।।
दूर से ही समझ जाती हो मुश्किलों को
माँ मैं वही चेतना,खुद में पाना चाहती हूँ ।।

Exit mobile version