वो तख्त कहाँ वो ताज कहाँ
वो कलगीधर सा शाह कहाँ।
हे दशमपिता हे गुरु गोविन्द
तेरे बिन मुझे कुछ चाह कहाँ।।
,,,,,,,,कोटि कोटि प्रणाम,,,,,,,,,
वो तख्त कहाँ वो ताज कहाँ
वो कलगीधर सा शाह कहाँ।
हे दशमपिता हे गुरु गोविन्द
तेरे बिन मुझे कुछ चाह कहाँ।।
,,,,,,,,कोटि कोटि प्रणाम,,,,,,,,,