दिल क्या कहता है
इस दिल की बात सुनू
दिल तो पागल है
फिर भी इसके साथ चलू
वे मक्शद आवारा पीछे भागा करता है
मैं समझ नहीं पाता पागल
ये प्यार किसी से करता है
कभी सासों सा धडकता है
कभी हवा में तैरा करता है
मैं समझ नहीं पाता पागल
ये प्यार किसी से करता
स्वछन्द अन्धेरी रातों को
कुछ सपने पिरोता रहता है
दिन के उजयारे में
हर पल मचलता रहता है
ख्वाबों की दुनिया में डूबा रहता है
मैं समझ नहीं पाता पागल
ये प्यार किसी से करता
मैं सो जाता हूँ रातों को
हर पल सीने में धडकता रहता है
मैं समझ नहीं पाता पागल
ये प्यार किसी से करता
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अनूप हसनपुरी
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