Site icon Saavan

पहली बार जगे थे, जो अरमान!

पहली बार जगे थे ,
जो अरमान !
तुम्हें देखकर!
वो ,निहारने का अंदाज
अभी भी रमा है,
मेरे जहन में ।

आंखों का आंखों से
वार्तालाप!
करने का हुनर
अभी भी बसा है,
मेरे ज़हन में।

फिर वहम ही है तेरा,
कि बदल गए हैं हम
अरे!मोहब्बत भरी धरा हो तुम मेरी ,
और मैं बारिश का बादल!
जो हमेशा बरसाता रहेगा
तुम पर ,
मोहब्बत !मोहब्बत! मोहब्बत!

Exit mobile version