नही हाथ में उंगलियां
पर पेट में हैं दात
जितना कमाती है किस्मत
उतना खाती आंत
उतना खाती आंत
करूं क्या मुझे बताओ
मेरी हालत पर
तुम ना हमदर्दी दिखाओ
काम कराओ
फिर मुझको दो
हक का दाना
मजदूर हूँ पर
मजबूर ना हमें बतलाना
कर्म करके भरता हूँ पेट
मुफ्त की मैं ना खाऊं
हूँ मजदूर इसी कारण
मैं मजबूर कहाऊं…