जीवन की इस आपधापी में कहीं खो सा गया है बचपन,
बाहर निकलने की बजाये घर में बैठकर बीत रहा है बचपन।
तकनीकी की इस दुनिया में मोबाइल फोन में खो सा गया है बचपन,
छोटी उम्र में बड़े सपनों का पीछा करने में बीत रहा है बचपन।
जिंदगी की दौड़ में, आगे निकलने की होड़ में खो सा गया है बचपन,
कल की फिक्र में बीत रहा है बचपन।
उन मासूम चेहरों को गंभीरता के साये ने घेर लिया है,
बचपन अब पहले जैसा बिल्कुल भी नहीं रहा है।
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