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बहन

कविता- बहन
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पता उसे तेरा बसेरा,
डाल पे किससे होता है|
यह भी पता था आना जाना,
कब कब तेरा होता है|

बोल सकी ना तेरे कारण,
भैया तुझको कहती है|
देख हंसी को वह भी हस्ती,
तेरी जान कहीं तो बसती है|

वह न कभी तुझे टोक रही थी,
ना तुझसे कभी पूछ रही थी|
देखा तुझको संग में उसके,
कभी ना तुझको डांट रही थी|

बात यहीं पर खत्म नहीं,
राज यहीं पर खत्म नहीं|
जान रही थी सब कुछ तेरा,
कभी मात-पिता से बोली नहीं|

अपने प्यार कि कीमत जस,
यदि समझ लिया होता ,उसका भी|
आज जमाना गाली देता-
यह जगत चुप होता-
यदि समझ लिया होता उसको भी|

ना फंदे को सिंगार बनाती,
ना हत्या की कदम उठाती|
समझ लिया होता रोना उसका,
ना घर से भागने की तैयारी करती|

मिल हत्या कर दी उसकी तुमने,
क्या प्यार ही उसका खता रहा|
आंख लड़ आया तुमने भी था,
तेरे लिए क्या सजा रहा|

जाति धर्म का दीवार तोड़ दो,
गरीब अमीर का साथ जोड़ लो|
कहे “ऋषि” सब जन से,
खुलकर उसकी इच्छा सुन लो|
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कवि- ऋषि कुमार “प्रभाकर”
पता -ग्राम पोस्ट ,खजूरी खुर्द -खजरी ,
थाना- तहसील कोरांव ,
जिला- प्रयागराज
पिन कोड 21 2306

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