बहन
कविता- बहन
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पता उसे तेरा बसेरा,
डाल पे किससे होता है|
यह भी पता था आना जाना,
कब कब तेरा होता है|
बोल सकी ना तेरे कारण,
भैया तुझको कहती है|
देख हंसी को वह भी हस्ती,
तेरी जान कहीं तो बसती है|
वह न कभी तुझे टोक रही थी,
ना तुझसे कभी पूछ रही थी|
देखा तुझको संग में उसके,
कभी ना तुझको डांट रही थी|
बात यहीं पर खत्म नहीं,
राज यहीं पर खत्म नहीं|
जान रही थी सब कुछ तेरा,
कभी मात-पिता से बोली नहीं|
अपने प्यार कि कीमत जस,
यदि समझ लिया होता ,उसका भी|
आज जमाना गाली देता-
यह जगत चुप होता-
यदि समझ लिया होता उसको भी|
ना फंदे को सिंगार बनाती,
ना हत्या की कदम उठाती|
समझ लिया होता रोना उसका,
ना घर से भागने की तैयारी करती|
मिल हत्या कर दी उसकी तुमने,
क्या प्यार ही उसका खता रहा|
आंख लड़ आया तुमने भी था,
तेरे लिए क्या सजा रहा|
जाति धर्म का दीवार तोड़ दो,
गरीब अमीर का साथ जोड़ लो|
कहे “ऋषि” सब जन से,
खुलकर उसकी इच्छा सुन लो|
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कवि- ऋषि कुमार “प्रभाकर”
पता -ग्राम पोस्ट ,खजूरी खुर्द -खजरी ,
थाना- तहसील कोरांव ,
जिला- प्रयागराज
पिन कोड 21 2306
सुंदर काव्य चित्रण
Ta🙏
वाह, वाह, बहुत सुंदर काव्य प्रतिभा है, सैल्यूट
Tq
वाह क्या कहने
🙏🙏🙏
एक बहन की असामयिक मृत्यु पर शोक दर्शाते और बचपन को याद करते भाई का मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी चित्रण।
🙏🙏🙏
बहन के विछोह का मार्मिक चित्रण ।
हमारे समाज में ऐसा ही होता आया है
जाने के बाद ही दर्द समझ में आया है
Tq
Tq
😭😭🙏🙏
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति
प्रेम प्रसंग किसी ना किसी का ,किसी ना किसी से जरूर होता है मगर सवाल हमेशा महिलाओं पर ही उठाए जाते हैं उनकी इच्छाओं , अभिलाषाओं को हमेशा दबाया जाता है जोकि बहुत ही गलत है
भावपूर्ण रचना
मेरी भी भाषा समझने के लिए थैंक यू
🙏🙏🙏
✍👏👏
Tq🙏🙏