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बूंद बूंद का प्यास

महेश गुप्ता जौनपुरी: बूंद बूंद का प्यार

बरसों जुदाई के बाद ये घड़ी आयी हैं
पिया मिलन की रूत आयी हैं
मोहब्बत कि फिजा संग बरखा लायी हैं
चल भीग जाते हैं इस सुहाने मौसम में
तु मेरी दिवानी बन मैं तेरा दिवाना बन जाऊं
प्यार में जीवन को मैं फना यूं ही कर जाऊं
पपीहा का प्यास बनकर तेरे बांहों से लिपट जाऊं
अरमान मोहब्बत का मैं तेरे जहां में लुटा जाऊं

महेश गुप्ता जौनपुरी

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