बूंद बूंद का प्यास

महेश गुप्ता जौनपुरी: बूंद बूंद का प्यार

बरसों जुदाई के बाद ये घड़ी आयी हैं
पिया मिलन की रूत आयी हैं
मोहब्बत कि फिजा संग बरखा लायी हैं
चल भीग जाते हैं इस सुहाने मौसम में
तु मेरी दिवानी बन मैं तेरा दिवाना बन जाऊं
प्यार में जीवन को मैं फना यूं ही कर जाऊं
पपीहा का प्यास बनकर तेरे बांहों से लिपट जाऊं
अरमान मोहब्बत का मैं तेरे जहां में लुटा जाऊं

महेश गुप्ता जौनपुरी

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

बरखा रानी

घिर-घिर आये मेघा लरज-लरज, घरङ-घरङ खूब गरज-गरज, प्रेम की मानो करते अरज, धरती से मिलने की है अद्भुत गरज। रेशम सी धार चमकीली, नाचती थिरकती…

Responses

New Report

Close