“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”
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एक बेटी को शिक्षित करने से
दो कुल शिक्षित हो जाते हैं।
फिर भी ना जाने क्यों लोग
अपनी बेटियों को नहीं पढ़ाते हैं ।
जल्दी शादी करने की
जाने क्या जल्दी होती है।
जो बेटियां पढ़ने नहीं जाती
उनकी क्या मजबूरी होती है ??
नि:शुल्क शिक्षा होने पर भी
क्यों नहीं बेटियां पढ़ पाती हैं ??
सफल होती है हर क्षेत्र में वह
जिस क्षेत्र में बेटियां जाती हैं ।
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ”
यह अभियान निरर्थक है ।
जब तक समाज में सड़ी सोंच के
जीवित रहे समर्थक हैं।
इस सोच से निकलकर
हम सब हम सबको बाहर आना है ।
प्रण करना है हम सबको
अपनी बेटियों को पढ़ाना है।।