भरी बरसात है, Satish Chandra Pandey 6 years ago ओढ़ लो छतरी भरी बरसात है, आंसुओं से भीग जाओगे कहीं। मेघ अब भी हैं घुमड़ते वक्ष पर इसलिए छतरी बिना आओ नहीं।