ओढ़ लो छतरी
भरी बरसात है,
आंसुओं से भीग जाओगे कहीं।
मेघ अब भी हैं घुमड़ते वक्ष पर
इसलिए छतरी बिना आओ नहीं।
भरी बरसात है,
Comments
14 responses to “भरी बरसात है,”
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Very nice
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Thank you
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बहुत अच्छे
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Thanks
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सुन्दर ।
छतरी कबतक ढाल बन साथ निभाएगी
हटते ही छवि साफ सभी को नज़र आएगी।-
वाह, इतनी सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद जी
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सुन्दर प्रस्तुति
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Very nice
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Thank you
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बहुत सुंदर रचना…..
छतरी ना भी हो तो आंसू पहचान जाओगे
वो कितने दुःखी हैं,एक पल में जान जाओगे।-
इस सुंदर समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद है गीता जी
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