भरी बरसात है,

ओढ़ लो छतरी
भरी बरसात है,
आंसुओं से भीग जाओगे कहीं।
मेघ अब भी हैं घुमड़ते वक्ष पर
इसलिए छतरी बिना आओ नहीं।

Comments

14 responses to “भरी बरसात है,”

  1. बहुत अच्छे

  2. Suman Kumari

    सुन्दर ।
    छतरी कबतक ढाल बन साथ निभाएगी
    हटते ही छवि साफ सभी को नज़र आएगी।

    1. वाह, इतनी सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद जी

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. Devi Kamla

    Very nice

    1. Satish Pandey

      Thank you

  5. बहुत सुंदर रचना…..
    छतरी ना भी हो तो आंसू पहचान जाओगे
    वो कितने दुःखी हैं,एक पल में जान जाओगे।

    1. Satish Pandey

      इस सुंदर समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद है गीता जी

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