ना रो बंदे,
ज़ार-ज़ार
ख़ुद पे कुछ
भरोसा तो रख
रोए तेरे बाद
ये ज़माना बार-बार
तुझे याद करके
ऐसा कुछ काम तो कर
*****✍️गीता
ना रो बंदे,
ज़ार-ज़ार
ख़ुद पे कुछ
भरोसा तो रख
रोए तेरे बाद
ये ज़माना बार-बार
तुझे याद करके
ऐसा कुछ काम तो कर
*****✍️गीता