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भेदभाव की बातें छोड़ो

भेदभाव की बातें छोड़ो
भारत देश सजाओ ऐसे
जिसमें सभी समान रूप से
गुँथे हुए हों माला जैसे।
जाति-धर्म के भेद हमारी
एका को कमजोर कर रहे,
वो छोटा मैं बड़ा कह रहे
नफरत व्यापार कर रहे।
भेदभाव है भीतर का घुन
इस घुन को अब दूर भगाओ,
सभी मनुष्य एक जैसे हैं
बस एका का भाव जगाओ।

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