20 Comments

  1. हमारे देश के विकाशपथ के हर कंटक का बहुत ही सटीक चित्रण किया है आपने ।
    हमारी प्रगति के सबसे बङे अवरोधक

    1. धन्यवाद जी, निश्चित तौर पर हमारे सामाजिक ताने -बाने में व्याप्त भेद की भावना प्रगति की सबसे बड़ी बाधक है।

  2. हे समाज के दर्पण
    क्यों सच कहते कहते रुक गए|
    डर था किसी का क्या, हे मानवता के राही,
    फिर सच लिखने से क्यों रुक गए|

    यह बात पुरानी हो गई है
    इससे अब कुछ मिलता ना|
    क्यों बाड़ छुपा रखा तरकस में,
    उठा अब भी कुछ बिगड़ा ना|
    ✍✍✍✍✍✍✍🙏
    बस सच्चाई से एक कदम दूर हैं
    बहुत खूबसूरत कविता

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